Porn Video सावधान! इंटरनेट पर ‘गंदा खेल’ खत्म! सोशल मीडिया पर अश्लीलता फैलाई तो 24 घंटे में होगी जेल
: सुप्रीम कोर्ट का सख्त फरमान: अब प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी, नहीं हटाया कंटेंट तो भुगतना होगा अंजाम

Porn Video/नई दिल्ली: भारत के उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बढ़ती अश्लीलता और अवैध कंटेंट पर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए डिजिटल दुनिया में हलचल मचा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब किसी भी प्रकार का पोर्नोग्राफिक या अवैध (illegal) कंटेंट सोशल मीडिया पर दिखाई देने के 24 घंटे के भीतर उसे हटाना होगा और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

फैसले का मुख्य बिंदु: 24 घंटे की ‘डेडलाइन’
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सोशल मीडिया कंपनियों (जैसे फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब) को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे एक ऐसा तंत्र तैयार करें जिसमें शिकायत मिलने के मात्र 24 घंटे के भीतर अश्लील सामग्री को ब्लॉक या डिलीट किया जा सके। कोर्ट ने कहा कि व्यक्ति की निजी गरिमा और विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता।
पोर्नोग्राफिक कंटेंट (Pornographic Content) की परिभाषा
कानूनी और तकनीकी दृष्टिकोण से, सुप्रीम कोर्ट और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियमों के तहत “पोर्नोग्राफिक कंटेंट” को निम्नलिखित बिंदुओं से परिभाषित किया गया है:
- यौन स्पष्ट सामग्री (Sexually Explicit Material): ऐसी कोई भी सामग्री (वीडियो, फोटो या टेक्स्ट) जो नग्नता (nudity) या यौन क्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से दर्शाती हो।
- बिना सहमति वाला कंटेंट (Non-Consensual Content): किसी व्यक्ति की जानकारी या सहमति के बिना उनकी निजी तस्वीरें या मॉर्फ्ड (AI द्वारा बदली हुई) अश्लील तस्वीरें साझा करना।
- बाल पोर्नोग्राफी (Child Pornography): बच्चों से जुड़ी किसी भी तरह की यौन सामग्री सबसे गंभीर श्रेणी में आती है। इसके लिए ‘पॉक्सो एक्ट’ (POCSO Act) के तहत तुरंत गिरफ्तारी का प्रावधान है।
- अश्लील प्रतिनिधित्व: महिलाओं का इस तरह से चित्रण करना जो सामाजिक नैतिकता के खिलाफ हो और अपमानजनक हो।
सोशल मीडिया कंपनियों की बढ़ेगी मुसीबत
अब तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘सेफ हार्बर’ क्लॉज का फायदा उठाते थे, जिसमें वे कहते थे कि कंटेंट यूजर ने डाला है, इसमें उनकी गलती नहीं है। लेकिन नए निर्देशों के बाद, अगर कोई प्लेटफॉर्म शिकायत के बाद भी 24 घंटे में कंटेंट नहीं हटाता, तो उस प्लेटफॉर्म को भी अपराध में साथ देने वाला माना जाएगा और उन पर भारी जुर्माना या प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
साइबर सेल और पुलिस को मिला ‘फ्री हैंड’
कोर्ट ने राज्यों की पुलिस और साइबर सेल को निर्देश दिया है कि ऐसी शिकायतों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाए। डीपफेक (Deepfake) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा बनाई गई अश्लील तस्वीरों पर भी कोर्ट ने गहरी चिंता जताई है। कोर्ट का मानना है कि डिजिटल फुटप्रिंट्स कभी मिटते नहीं, इसलिए अपराधियों को पकड़ना अब पहले से आसान है।

आम जनता के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यूजर्स को अब डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते समय अधिक सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी अश्लील वीडियो को ‘फॉरवर्ड’ करना या ‘शेयर’ करना भी उतना ही बड़ा अपराध है जितना उसे बनाना।











